2020 नव वर्ष के पहले दिन रामलला को लगा 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग
रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला को वर्ष 2020 के पहले दिन 56 तरह के व्यंजनों का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। यह भोग रामलला के एक भक्त ने अपनी मुराद पूरी होने के फलस्वरुप लगाया। इस भक्त ने मनौती मांगी थी कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला रामजन्मभूमि के पक्ष में आएगा तो वह रामलला को 56 प्रकार के विविध व्यंजनों का भोग लगाएंगे। साल के पहले दिन भोग लगाने के लिए उन्होंने रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास से आग्रह किया था।
मालूम हो कि अयोध्या के वैष्णव मंदिरों में रामजन्मभूमि अकेला ऐसा मंदिर है जहां सुप्रीम कोर्ट का आदेश चलता है। कोर्ट के आदेशानुसार नियुक्त अधिकृत व्यक्ति/रिसीवर ही व्यवस्था करते हैं। यह स्थिति नौ नवम्बर के पूर्व तक कायम थी। उसके पीछे सबसे बड़ा कारण रामलला की सुरक्षा का था। इसके चलते जिला प्रशासन लड्डू व पेड़े का भोग-प्रसाद भी अंदर ले जाने की इजाजत दर्शनार्थियों को नहीं देता है। जिला प्रशासन ने पारदर्शिता के लिहाज से अधिग्रहीत परिसर में मिश्री ले जाने की ही इजाजत दी है।
इसके पहले हैदराबादी नवाब ने यहां तत्कालीन रिसीवर/मंडलायुक्त की इजाजत से रामलला को 51 किलो लड्डुओं का भोग लगाया था। मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने प्रशासनिक अनुमति के आधार पर रंगमहल बैरियर पर लड्डुओं को प्राप्त भी किया लेकिन वह मानस भवन से आगे नहीं ले जा सके।
नौ नवम्बर के फैसले के बाद कोर्ट के अवमानना की समस्या नहीं रह गई: शेष मंदिरों में भक्तों की इच्छा पर आए दिन भंडारा होता है और भगवान को विविध व्यंजनों का भोग लगाया जाता है लेकिन रामजन्मभूमि में दीपावली के उपरांत होने वाले अन्नकूट महोत्सव के दौरान ही 56 प्रकार के व्यंजन उपलब्ध कराए जाते रहे हैं। पुजारी दास ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नौ नवम्बर के फैसले के बाद कोर्ट की अवमानना की समस्या नहीं रह गई है। ऐसे में प्रशासनिक समस्या भी दूर हो गई है और भक्तों की इच्छा का सम्मान हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में लखनऊ निवासी मनीष गुप्त ने आग्रह किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया। वह अपने घर से पैकेट बनाकर लाए थे जिसे सुरक्षा की दृष्टि से जांचकर भोग लगाया गया। परिसर के सुरक्षा अफसर ने बताया कि रामलला के भोग प्रसाद से कोई एतराज नहीं है। सुरक्षा में कोई कमी नहीं रहे। यही प्राथमिकता है।
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