मेरे विचारों से आप सहमत न भी हों तब भी मेरे विचार आपको खुद पर सोचने के लिए मजबूर अवश्य कर देंगे- न्यायाधीश कपिल देव
मॉडल स्कूल नरसिंहगढ़
किसी भी व्यक्ति को तीन चीजें उसे महान बना सकती हैं, पहला सादगी, दूसरा धैर्य और तीसरा उसका कर्म ।
व्यक्ति को हमेशा सत्य के साथ जीना चाहिए और हमेशा सत्य का ही साथ देना चाहिए। यह विचार न्यायाधीश कपिल देव द्वारा नरसिंहगढ़ के मॉडल स्कूल मैं छात्र-छात्राओं के समक्ष व्यक्त किए गए। अमूमन न्यायपालिका में ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि न्यायाधीश अपने न्यायालयीन कार्य के अतिरिक्त समय निकाल पाते हो लेकिन मध्यप्रदेश न्यायपालिका में कपिल देव एक ऐसे न्यायाधीश हैं जो हमेशा ही अपने न्यायालय समय के अतिरिक्त छात्र-छात्राओं के समक्ष उपस्थित होकर उन्हें प्रेरक कहानियां सुनाकर जागरूक करते रहते हैं। वह कहते हैं कि हमारा मूल कर्तव्य उन व्यक्तियों के प्रति होता है जिन्हें हम नहीं जानते । क्योंकि जिन्हें हम जानते हैं उनकी मदद करने वाले कई व्यक्ति हैं लेकिन जिन्हें हम नहीं जानते उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है हमें अवश्य ही उनकी मदद करना चाहिए। जज कपिल देव ने इस बार छात्रों को भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की कहानी सुनाई उन्होंने कहा कि एक बार चिड़ियों को आसमान में उड़ता हुआ देखकर अब्दुल कलाम ने कक्षा में अपने शिक्षक शिव सुब्रमण्यम अय्यर से पूछा कि पक्षी कैसे उड़ते हैं तब उनके शिक्षक सभी छात्रों को रामेश्वरम के तट पर ले गए और उड़ते हुए पक्षियों को दिखाया और उन्होंने बताया कि विमान भी इसी सिद्धांत के आधार पर उड़ता है। इसके बाद कलाम को पक्षी की उड़ान का रहस्य समझ में आ गया। कलाम साहब ने कहा कि एक लेक्चर ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। 'उनके शिक्षक ने उन्हें जीवन का उद्देश्य दे दिया। उन्हें भौतिक विज्ञान के अध्ययन का महत्व समझ में आ गया। उन्होंने भौतिकी को चुना, एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग को प्राथमिकता दी और फिर रॉकेट इंजीनियर बने। उसके बाद अंतरिक्ष वैज्ञानिक।' जिसके बाद भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक नया कदम रखते हुए अग्नि ,पृथ्वी और ब्रह्मोस जैसी बड़ी-बड़ी मिसाइलों का निर्माण किया। कपिल देव ने छात्रों को बताया कि सफल होने का कोई विशेष मूल मंत्र नहीं है । हमें निरंतर ही कठोर परिश्रम करते रहना पड़ता है । उन्होंने कहा कि निरंतर चलती हुई एक चींटी एक ऊँघते हुए बैल से ज्यादा मेहनत करती है। जैसा आप अपने बारे में सोचते हैं आप वैसा ही बन जाते हैं और जिस चीज के योग्य आप होते हैं वह आपको तत्क्षण ही प्राप्त हो जाती है। यदि हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल हुए हैं तो इसमें निश्चित ही हमारी ही गलती होगी। हम अपनी असफलता के लिए कभी भी किसी अन्य को दोष नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि आप सभी मेरे विचारों से सहमत ना भी हो तब भी मेरे विचार आपको खुद पर सोचने के लिए मजबूर अवश्य कर देंगे। हमें सभी जीवो के प्रति दया का भाव रखना चाहिए क्योंकि सभी जीव अपने अपने क्षेत्र में निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। हमें लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में अंत समय भी उतने ही सजग रहना चाहिए जितने हम आरंभ में थे तो कोई असफल हो ही नहीं सकता । जो अच्छे हैं उनके साथ अच्छा व्यवहार कीजिए और जो अच्छे नहीं हैं उनके साथ भी अच्छा व्यवहार कीजिए ,यदि उनमें कोई सुधार नहीं होता है तो उन्हें अपने मार्ग पर जाने देना चाहिए और हमें अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए । इस जागरूकता शिविर के दौरान मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल के समस्त छात्र और शिक्षक गण उपस्थित रहे।